ज़िलेवार भूकंप ज़ोन: बिहार और झारखंड
बिहार देश के सबसे ज़्यादा भूकंप वाले राज्यों में से एक है, और उत्तर बिहार सबसे ऊंचे ज़ोन में आता है। घर का डिज़ाइन बनवाने से पहले अपने ज़िले का ज़ोन देख लीजिए।
बिहार एक नज़र में
- ज़ोन V (बहुत ज़्यादा): अररिया, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल; पूर्वी चंपारण, किशनगंज, मधेपुरा और सहरसा के कुछ हिस्से
- ज़ोन III (मध्यम): अरवल, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, गया, जहानाबाद, कैमूर, नवादा, रोहतास
- ज़ोन IV (ज़्यादा): बाकी सभी ज़िले, जिनमें पटना, मुज़फ़्फ़रपुर, भागलपुर और पूर्णिया भी हैं
झारखंड एक नज़र में
- ज़ोन IV: साहिबगंज, गोड्डा
- ज़ोन III: धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, देवघर, दुमका, कोडरमा, पाकुड़, जामताड़ा
- ज़ोन II: रांची, पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर)
- बाकी ज़िले ज़ोन II या III में हैं। हमारे स्रोतों से पक्का नहीं होता कि कौन-सा, इसलिए सुरक्षा के लिए यह टूल ज़ोन III मानकर चलता है।
आपके ज़ोन का आपके घर पर क्या असर है
ज़ोन IV और V में कॉलम और बीम IS 13920 की डक्टाइल डिटेलिंग के हिसाब से बनने चाहिए (पास-पास रिंग/स्टिरप, सही लैप और हुक)। खुले स्टिल्ट फ्लोर वाले घर में कॉलम का सही डिज़ाइन ज़रूरी है। ज़ोन II या III के मुकाबले लगभग 10–15% ज़्यादा सरिया लगेगा, यह मानकर चलिए। 1934 के बिहार–नेपाल भूकंप (तीव्रता 8.0) ने मुज़फ़्फ़रपुर, मोतिहारी, दरभंगा और मुंगेर में भारी तबाही मचाई थी।
अभी लागू कोड IS 1893 (Part 1):2016 है। नए ज़ोन VI वाला 2025 का संशोधन BIS ने मार्च 2026 में वापस ले लिया।
स्रोत
- IS 1893 (Part 1):2016, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)
- बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण: Know Your Risk
- झारखंड के भूकंप ज़ोन पर राज्यसभा में दिया गया जवाब (2020)